महाशिवरात्रि पर निबन्ध (कथा कविता कहानी शायरी): Essay on MahaShivaratri in Hindi

क्या आप महाशिवरात्रि पर निबंध लिखना चाहते हैं?
क्या आप महाशिवरात्रि की व्रत कथा और महाशिवरात्रि की पूजाविधि जानना चाहते हैं?
अगर हाँ, तो आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की महत्व क्या है और महाशिवरात्रि क्यूँ मनाया जाता है?

हमारे देश भारत त्यौहार के लिए पूरा विश्व में प्रसिद्द है| भारत को देवताओं की नगर भी कहा जाता है| हम पुरे साल न जाने कितने त्यौहार को मनाते हैं| जैसे की, मकर संक्रांति, पोंगल, महा शिवरात्रि, होली, दशहरा| ये सब हमारी संस्कृति और इतिहास की कथाओं को दर्शाते हैं|

इन सारे त्यौहार में से महाशिवरात्रि त्यौहार भी पुरे देश में काफी धूम धाम और श्रद्धा से मनाया जाता है| महाशिवरात्रि त्यौहार भगवान् शिवजी की स्मरण में मनाया जाता है|
आइए जानते हैं की महाशिवरात्रि त्यौहार क्या है और इसे कैसे मनाई जाती है?

महाशिवरात्रि पर निबन्ध

महाशिवरात्रि पर निबन्ध (250-300) शब्दों में:  Essay on MahaShivaratri in Hindi (250-300 words):

निचे नील रंग में हमने महाशिवरात्रि पर एक निबंध भी पेश किया है जो की  विद्दार्थियों के लिए काफी उपयोगी और मददगार होगी| स्कूल की बच्चों और अन्य विद्दार्थियों इससे निबंध भी लिख सकते हें जो की काफी सूचनात्मक है|

महाशिवरात्रि की त्यौहार भारत में काफी लोकप्रिय है| ये दिन पूरा देश शिवजी की भक्ति और श्रद्धा में लीन रहता है| महाशिवरात्रि त्यौहार हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशि को मनाया जाता है| ये त्यौहार हर साल फ़रवरी या मार्च महीने में आती है| 

महाशिवरात्रि की दिन शिवजी की मंदिरों में भक्तों की लम्बी कतार देखने को मिलती है| इस दिन हर भक्त शिवजी की दर्शन के लिए बड़ा ही व्याकुल रहता है| लोग अपने साथ फूल, फल, दूध, गंगाजल, धुप, दिए, सक्कर, चावल, आदि लाते हैं ताकि ये सब शिवजी को अर्पित कर सकें|

सबसे पहले शिवजी की लिंग को पानी और गंगाजल से नहलाया जाता है| उसके बाद उस पर दूध, गुड और सक्कर डाल कर अभिषेक किया जाता है| फिर पुष्प की भेंट दी जाती है| उसके बाद धुप और दिए जला कर सब कोई आरती ग्रहण करते हैं|

कुछ लोग इस दिन महाशिवरात्रि की व्रत रखते हैं| लोग दिन भर शिवजी की स्मरण में अपना समय बिताते हैं| कुछ इलाकों में रात को शिवजी की बरात भी निकाली जाती है| रात भर लोग मंदिरों या अपने घरों में रात्री जागरण भी करते हैं| रात को पूजा के बाद ही भक्त अपने व्रत खोलते हैं|

महाशिवरात्रि की पर्व मानने के पीछे कई कारण बताया जाता है| कुछ लोग के हिसाब से इस दिन भगवान् शिवजी और माता पार्वतीजी की शादी हुई थी| और कुछ के हिसाब से इस दिन भगवान ब्रह्मा के रूद्र से शंकर भगवान् का अवतरण हुआ था|

हमारे देश में महाशिवरात्रि वाराणसी, हिमाचल प्रदेश की मंडी, हरिद्वार और ऋषिकेश में काफी प्रसिद्द है| यहाँ महाशिवरात्रि के दिन भक्तों की भीड़ लाखों की तादार्द पर आती है| तो आइए शिव जी की इस पावन दिन पर हम सब “ॐ नमः शिवाय” की मंत्र की स्मरण करें|

महाशिवरात्रि त्यौहार क्या है? What is MahaShivaratri?

महाशिवरात्रि त्यौहार भारत देश में एक पवित्र त्यौहार है जो भगवान् शिव जी की भक्ति में पुरे देश में बड़े ही श्रद्धा से मनाया जाता है| महाशिवरात्रि त्यौहार हिन्दू धर्म की मुख्य पारंपरिक त्यौहार है| ये त्यौहार शिवजी की भक्ति और अराधना को स्मरण में रख कर मनाई जाती है|

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महाशिवरात्रि कब है? When is Mahashivaratri Celebrated In India?

महाशिवरात्रि का पर्व हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशि को मनाया जाता है| ये त्यौहार हर साल फ़रवरी या मार्च महीने में आती है|

वैसे तो हर माह में एक शिवरात्रि होती है| लेकिन फाल्गुन महीने की शिवरात्रि की अत्यंत महत्व है| इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है|

इस दिन हिन्दू धर्म में एक महत्व दिन है क्यूंकि इस दिन भगवान् शिवजी को लेकर काफी कथाएँ पौरानों में चर्चित है|

2019 में महाशिवरात्रि कब है? When is Mahashivaratri in 2019?

इस साल 2019 में महाशिवरात्रि  4 march 2019 को मनाया जाएगा|

महाशिवरात्रि की महत्व क्या है? Why is MahaShivaratri Celebrated?

महाशिवरात्रि पुरे देश भर में बड़े ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है| महाशिवरात्रि मनाने के पीछे कई कारण हैं|

  • विद्द्वानों  की माने तो महाशिवरात्रि मनाने के पीछे कई कारण हैं| ये दिन शिवजी की महिमा और दयालु होने की कथाओं से भरी है|
  • कुछ लोगों की ये मानना है की महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिवजी का जन्म हुआ था| उनके भक्त इस खुशी को मनाने के लिए शिव जी की अराधना करते हैं|
  • ये भी माना जाता है की इस दिन भगवान शिवजी की विवाह माता पार्वतीजी के साथ हुआ था| इसी खुसी में महाशिवरात्रि मनाया जाता है|
  • कुछ भक्तों का ये भी मानना है की महाशिवरात्रि के दिन भगवान ब्रह्मा के रूद्र से शंकर भगवान् का अवतरण हुआ था|
  • कुछ ये भी मानते हैं की भगवान शिवजी ने इस दिन तांडव कर अपने तीसरे नेत्र को खोला था और ब्रह्माण्ड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर दिया था|
  • कुछ लोग तो ये भी कहते हैं की समुद्र से निकली विराट मात्रा की विष को भगवान शिवजी ने इस दिन पुरे विश्व की रक्षा के लिए अकेले पी लिया था| इसलिए उनके कंठ नीला हो गया था जिसके कारण उन्हें “नीलकंठ” के नाम से भी जाना गया|
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महाशिवरात्रि पूजा विधि: How is Mahashivaratri Celebrated?

महाशिवरात्रि पर्व पुरे देश में बड़े ही धार्मिक और श्रद्धा से मनाया जाता है| इस दिन शिव मंदिरों में प्रातः से ही भक्तों की लम्बी कतार दिखाई देती है| भक्त शिवजी की दर्शन के लिए बड़े ही व्याकुल नज़र आते हैं|

कुछ लोग दिन भर शिवजी की महिमा में महाशिवरात्रि की व्रत भी रखते हैं और खाली फलों का आहार करते हैं| और कुछ लोग इस दिन पुरे निर्जला उपवास भी रखते हैं| कई इलाकों में रात को शिवजी की मेला भी किया जाता है| रात को शिव जी की दर्शन और अपने पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है| कई जगहों पर शिव जी की कथाओं को सुनाया जाता है|

शिवजी को इस पावण दिन दर्शन के लिए भक्तजनों मंदिरों में लम्बी कतार में लग जाते हैं| हर भक्त अपने साथ अपनी श्रद्धा और आस्था लिए शिवजी के दर्शन के लिए व्याकुल रहता है|

मंदिरों में भक्तों के द्वारा काफी फल और प्रसाद चढ़ाया जाता है| कुछ भक्त शिवजी की दर्शन के लिए फूल, और फल ले कर जाते हैं| महाशिवरात्रि के दिन हर भक्त शिवजी की लिंग पर फूल, दूध, सिन्दूर, गंगाजल, और बेल के पत्ते चढाते हैं| धूप और दीप से शिवजी की पूजा किया जाता है| फिर उनकी आरती उतारी जाती है|

बेल के पत्ते शिवजी की काफी प्रिय है| शिवजी की अन्य प्रिय वस्तुओं में से धतूरा फूल भी एक है|

ऐसा कहा जाता है की शिवजी को भंग बहोत पसंद है, इसलिए महाशिवरात्रि के दिन भक्तजण शिवजी को भंग भी अर्पित करते हैं|

इस दिन कुछ मंदिरों और तीर्थ जगहों पर शिवजी की कथा और पौराणिक हिस्सों के बारे में प्रवचन भी होते हैं जिसमें भक्त लोग रात भर मदहोश रहते हैं|

महाशिवरात्रि को रात्री जागरण का भी एक परम्परा है जो की कुछ लोग पुरे रात भर जागरण कर शिव जी की अराधना करते हैं|

इस दिन स्कूल और कॉलेज के साथ साथ शमस्त सरकारी दफ्तरों में छुट्टी होती है ताकि हर किसी को अपना श्रद्धा और आस्था भगवान् शिवजी के सामने रखने का अवसर मिले|

अगर कोई जण निति नियम के बारे में अनजानत हो तो वह भी शिव जी की अराधना और भक्ति में सीधे साधे ढंग से लीन हो सकता है|

इस दिन हमें टीवी और अखबारों पर भी शिव जी की कथाएँ देखने को मिलते हैं|

ये त्यौहार भारतवर्ष की एक मुख्य दिन है जो हर किसी को भक्ति और श्रद्धा के रस्ते ले आती है|

महाशिवरात्रि व्रत कथा: Story on MahaShivaratri: चित्रभानु की कथा

महाशिवरात्रि पर्व को मनाने के पीछे कई कारण हैं जो हमें अपने पौराणिक और ग्रांथिक विचारों के और ले जाता है| ये दिन हर किसी के लिए काफी महत्वपूर्ण दिन है|
कुछ विद्वानों के हिसाब से महशिवरात्रि के कई पौराणिक कथाएं हैं|

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ऐसे ही अनेक कथाओं में से एक है बहुचर्चित चित्रभानु की कथा|

चित्रभानु एक अनपढ़ कठोर दिल का इंसान था| वह जंगलों में निवास कर जानवरों को मारकर खाता है| उसे पूजा पाठ पर कोई ज्ञान या विस्वास नहीं था| ऐसे ही हर दिन के तरह वह जंगल में घूमता था| एक महाशिवरात्रि के दिन वह कहीं सहर की और निकला था| वहाँ उसने महाशिवरात्रि की कथा सुनी| वह शाम को जब वापस जंगल के लिए लौटा, तो थोड़ी ज्यादा अन्धेरा हो चूका था| रात  बिताना पड़ेगा सोच कर उसके मन में डर पैदा हुआ| वह जंगल में अपने लिए एक छोटा स कुटिया बनाया था जहाँ वह रात को रहते था|

वह डर के मारे एक बड़े पीपल के पेड़ में चढ़ गया| वह शिव जी की और पीपल के पेड़ की लगाओ से बिकुल अनजान था| वह पूरी रात डर डर के पेड़ के ऊपर बैठा था| वह पेड़ के ऊपर से एक एक पत्ता तोड़ के निचे जमीन पर डालता था| और हर पत्ते तोड़ने के साथ सहर की सुनी शिव कथा के बारे में सोच सोच कर “ॐ नमः शिवाय” बोल रहा था|

भगवान् की लीला भी सोचने की है की उसी पेड़ के निचे पत्तों की ढेर थी जिसके निचे एक शिव लिंग थी| चित्रभानु की ऊपर से डालते पत्ते ठीक उसी शिवलिंग के ऊपर जा गिरते थे| भगवन शिव चित्रभानु की ये सब देख कर काफी प्रसन्न हुए| लेकिन चित्रभानु अब तक सारे विधि से अनजान था| पूरी रात भर शिव जी के लिंग के ऊपर अनजाने में पत्ते डालते डालते न जाने कब उसकी आंखे लग गयी| जब सवेरे उसकी आँख खुली, तो उसको अपने व्यवहार पर बदलाव महसूस होने लगा| उसे अचानक शिकार करना पाप लगने लगा| उसमे अब समझ आ गई थी| वह और पहले जैसा नहीं रहा|

उसमे ये सब बदलाव आते ही वह धीरे धीरे सहर की और चलने लगा और मेहनत कर अपने पेट पालने लगा|

इस कथा से हमें ये पता चलता है की शिवजी काफी दयालु हैं| वह अपने भक्तों के अनजाने में की हुई श्रद्धा को भी फल देते हैं|

महाशिवरात्रि के दिन कहाँ जाएँ तीर्थ? Which are the best Holy places for visit on Mahashivaratri Day?

भारत में महाशिवरात्रि कई जगहों पर बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है| हिमाचल प्रदेश की मंडी, वाराणसी, हरिद्वार, ऋषिकेश, गुवाहाटी, शिवसागर, खजुराहो जैसे तीर्थ स्थानों में महाशिवरात्रि काफी प्रदिद्ध है| महाशिवरात्रि के दिन यहाँ लोग लाखों की तादार्द में दर्शन करने आते हैं| इन स्थानों में इस दिन काफी मात्रा में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है|

तो आइये हम सब मील कर इस शिवरात्रि के दिन अपने आप को शिवजी की चरणों में समर्पित कर दुनिया की मोह माया से मुक्ति पाएं| चलिए एक बार सब मिल कर शिवजी की मंत्र “ॐ नमः शिवाय” की पुकार करते हैं और महाशिवरात्रि को धूमधाम से मनाते हैं|

“हर हर महादेव”!!!!

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