मंगल पांडे की जीवनी (Mangal Pandey Life History/ biography Nibandh in Hindi)

Mangal Pandey ki jivani anmol bachan biography in Hindi PDF
Mangal Pandey Ki Jivani biography In Hindi

क्या आप मंगल पांडे की जीवनी के बारे में जानना चाहते हें?

अगर हाँ, तो आइए इस आर्टिकल में हम भारत के वीर शहीद मंगल पांडे की प्रेरणादायक जीवनी को जानते हें|

साथ में आप मंगल पांडे की जीवनी इन हिंदी PDF फॉर्मेट में download कर सकते हें|

हमारे देश “भारत” के आज़ादी में कई महापुरुषों के कड़ी मेहनत, सच्ची देश भक्ति और निडरता के रंग आज भी साफ़ झलकता है | उन महापुरुषों में से एक हें मंगल पांडे जी | उनके भारत के लिए कुर्बानी आज भी हमारे आँखों में आँसू ले आता है | मंगल पांडे की छोटी सी उम्र में ही देश के लिए कुर्बानी आज भी हमें ये याद दिलाता है की “जियो तो अपने देश के लिए जियो” |

आइए आज इस महान पुरूष की जीवन के बारे में विस्तार से समझते हें|

विषय सूचि

मंगल पांडे  की जीवनी in Hindi: मंगल पांडे के बारे में जानकारी (Mangal Pandey Life history/ biography in Hindi)

इस भाग में आज हम देश की वीर पुत्र मंगल पांडे की आत्मा-कहानी को जानेंगे और उनके प्रेरणादायक जीवन से सीख लेंगे|

मंगल पांडे  की प्रारंभिक जीवन हिन्दी में:

मंगल पांडे का जन्म १९ जुलाई सन १८२७ को उत्तर प्रदेश के बल्लिया डिस्ट्रिक्ट के नगवा नामक गाँव में हुआ था | मंगल पांडे एक उंछ ब्राह्मण जाती के जमींदार के घर में जन्म लिए थे जो की हिन्दू धर्म में ध्रूड विस्वास रखते थे | मंगल पांडे के पिता का नाम दिवाकर पांडे और माता का नाम अभय रानी था | पाण्डे जीदेश के लिए ऊँचे सपने देखने और उन्हें साकार करने की पूरी कोशिश करने वालों में से थे | वह अपनी जिंदगी में एक सिपाही बन के देश को सुरक्षित रखना अपना धर्म मानते थे |

मंगल पांडे की स्वभाव कैसा है?

मंगल पांडे बचपन से ही देश की सच्चे भक्त थे और उनके जीवन का एक ही मकसद था की भारत में सिर्फ उनके भक्तों के लिये जगह है और इस देश में कोइ राजा या कर्मी नहीं, बल्कि सब समान हैं, और सब को देश की जरुरत के समय बिना सोचे देश के लिए जरुरत पड़े तो अपनी जान भी देने से हिचकिचाना नहीं चाहिए | मंगल पांडे स्वभाव से अति शांति लेकिन गाम्भीर स्वभाव के थे |

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मंगल पांडे की स्वतंत्रता सेनानी: जानिए मंगल पांडे की सिपाही जीवनी हिंदी में:

मंगल पांडे जैसे शांत और सरल स्वभाव की व्यक्ति प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम योद्धा कैसे बने , इसके पीछे एक कहानी है| आइए जानते हें मंगल पांडे की सिपाही जीवन के बारे में|

एक बार मंगल पांडे अपने किसी निजी काम के लिए अकबरपुर आए हुए थे | ठीक उसी समय कंपनी की सेना बनारस से लखनऊ जा रही थी | मंगल पांडे सेना की मार्च देखने के लिए शौक में रस्ते के एक कोने में खड़े हो कर मार्च देखने लगे| ठीक इसी समय वहाँ के एक सेना अधिकारी की नज़र मंगल पांडे पर पड़ी|

वह अधिकारी पांडे की स्वस्थता और जोश को देखकर प्रसन्न हो गया | वह अधिकारी मंगल पांडे को सेना में भर्ती होने का प्रस्ताव रखे, जिसे सुन के पांडे ने झट से हाँ बोल दिया और कुछ ही दिनों में सेना के हिस्सा बन गए |

मंगल पांडे ३४थ बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के ६थ कंपनी में एक सैनिक के पोस्ट के लिए चुने गए | देश  की सिपाही बन के देश भक्ति में जुट जाना उनके धर्म विचार में बाधा बनने के कगार में आ रहा था | वह  इसलिए क्यूंकि जब वह मिड १८५० के दौर में बर्रच्क्पोर के गर्रिसो में बत्तौर सैनिक तैनात किये गए थे, तब सभी सैनिको को एक नए तरह के राइफल का परिचय किया गया था | इस रायफल में हर सैनिक को गोली रिफिल करने के लिए उसके पीछे के भाग को मुह से खोलने का सिस्टम था |

इस दौरान गुजब्ब ऐसे भी उडे की रायफल के पीछे के भाग को गाय या सूअर के चर्बी से बनाया गया था जो कि एक हिन्दू या मुसलमान क्रमश:  के धर्म के सख्त खिलाफ है |

ये विस्वास या गुजाब बिजली के तरह सारा सैनिक फाॅर्स में फ़ैल गया की ब्रिटिश के कर्मी हमारे धर्म और संस्कृति का मज़ाक बना रहे हें |

भारतीय सैनिको के साथ क्रूर व्यवहार और भेदभाव के कारण पहले ही उनमे असंतोष और गुस्सा कूट कूट के भरा था, और ऊपर से  रायफल में धर्म विरुद्ध सिस्टम ने पूरे भारतीय सैनिको को “बस हो गया” स्तिथि में ला खड़ा कर दिया था | ९ फ़रवरी १८५७ को जब नया कारतूस (रायफल) को सैनिको मे बांटा गया, तो भारत के शेर मंगल पांडे ने इसे लेने से साफ़ मना कर दिया | ब्रिटिश राज को ये अपने गाल पर तमाचा पड़ने जैसा महसूस हुआ |

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कहीं मंगल पाण्डे के निष्पति से सारे सैनिक बल कारतूस लेने से मना न कर दें, इस डर से मंगल पांडे को रायफल और वर्दी उतारने का हुकम झट से जारी कर दिया गया | लेकिन मंगल पांडे ने इस आदेश को नहीं माना और २९ मार्च सन १८५७ को उनकी रायफल छिनने के लिए आगे बढ़ने वाले अंग्रेज अफसर पर आक्रमण कर दिया | इस प्रकार संदिग्ध रायफल का इस्तेमाल ईस्ट इंडिया कंपनी को घातक साबित हुआ |

अंग्रेजों की मन मानी करने के खिलाफ मंगल पांडे ने २९ मार्च १८५७ बरकपुर छावणी में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रूह का नारा लगा दिया |

मंगल पांडे का भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम में एहम किरदार: (Role of Mangal Pandey in First Independence fight)

मंगल पांडे के अंग्रेज विरोध नारे और निडरta से सामना करना कई भारतीयों के लिए एक आत्मीय शक्ति का काम किया | ये नारे और डट के अपना पख्य रखना हर भारतीय में एक जागरूकता और साहस का दीप जला गया| नतीजा ये के, मंगल पांडे के विद्रोह के ठीक एक महीने बाद यानी की १० मई सन १८५७ को मेरठ के सैनिक छावनी में भी बगावत हो गयी और ये विद्रोह देखते ही देखते बिजली के बेग में पूरा उत्तरी भारत में फ़ैल गया |

ये विद्रोह इतना बड़ा रूप ले लिया की ये अंग्रेजों के जड़ों को अन्दर से हिला के रख दिया | अब भारत के हर कोनों और सड़कों पर आन्दोलन की एक लहर सी छा गयी जो की अपने साथ हुए अपमान का बदला और पूरी आजादी का मांग कर रहा था |

यद्दपि अंग्रेजों की भारी सैनिक बल और फाॅर्स ये आन्दोलन को कुछ हद् तक दबाने में सफल हो गए,लेकिन मंगल पांडे द्वारा सन १८५७ में किये हुए कड़ी क्रांतिकारी मेहनत ९० साल बाद सुपरिणाम लाया |

इस विद्रोह जिसे भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा जा रहा है, इसमें सैनिकों समेत राजा परिवारें, किसान वियापरी और मजदूर वर्ग तक सामिल् हुए | ये एकाग्रता अंग्रेजों को खुला मूह छोड़ गया और वह ये समझने लगे की भारत जैसे राष्ट्र में उन जैसों के लिए कोई जगह नहीं | ये उनके लिए एक सोचने और सोचते रह जाने का विषय बन गया |

मंगल पांडे की कथन ओर अनमोल वचन हिंदी में  (Mangal Pandey Quotes in Hindi)

हम आपके लिए मंगल पांडे की कही हुई कुछ अनमोल वचन व कथन पेश किये हें|

 आज तक आपने हमारे वफादारी देखि है, अब हमारा क्रोध देखिये |

यह आजादी की लड़ाई है… गुज़रे हुए कल की लड़ाई… आने वाले कल के लिए|

इस तरह की कुछ महान कही हुई कथन आज भी हमें प्रेरित करते हें|

मंगल पांडे के लिए आज भी हमरा अटूट श्रद्धा और सम्मान:

न जाने इस देश के मिटटी में भारत के वीर पुत्र व योद्धा मंगल पांडे के साहासी और निस्वार्थ कर्म के कितने बार नाट्य रूपान्तर किया जा चूका  है | चाहे वह स्कूल कॉलेज के बच्चो के द्वारा हो या फिल्म दुनिया के नायक नायिका में हो, लेकिन आज भी मंगल पांडे के साहस के नाट्य रूपान्तर किया जा रहा है |

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मंगल पण्डे पर बनी बॉलीवुड फिल्में: (Bollywood Films on Mangal Pandey)

मंगल पांडे के नाम से रचित एक फिल्म हर भारतीय के दिलों को छु गया जिसमे सुपरस्टार आमिर खान मंगल पांडे के किरदार को बह्खूबी निभाये |

मंगल पांडे को सरकार द्वारा दिया हुआ सम्मान:

भारत के गौरव पुत्र मंगल पांडे को सम्मान जताते भारत सरकार ने उनके नाम के एक डाक टिकेट जारी किया जो ये याद् दीलाता है की भारत माता की जमीन कोई पापी या कुविचार वालों के लिए नही है |

मंगल पांडे की जीवनी सन्खेप में (In Hindi): मंगल पाण्डे जीवनी हिंदी: (Short Essay on Mangal Pandey Life story):

दोस्तों, निचे नीले रंग में दिया हुआ अंश “मंगल पांडे की जीवनी  पर निबंध है| इसे आप ज्यों का त्यों अपने भाषण और निबंध में इस्तेमाल करें| इस विषय में अधिक जानकारी के लिए नीले अंश के निचे मंगल पांडे के बारे में कई रोचक तथ्य  हें| उन्हें पढना मत भूलिए|

मंगल पांडे का जन्म उत्तर प्रदेश के एक साधारण ब्राह्मण परिवार में 19 जुलाई 1857 में हुआ था| वह 22 साल की उम्र में ही सेना में भर्ती हो गए| वह एक ब्रिटिश सेना अधिकारी को कोल्कता में आक्रमण बोल दिए जिस कारण उनको तुरंत अरेस्ट कर लिया गया| मंगल पांडे को 8th April 1857 को फासी दिया गया और उनकी मृत्यु हो गयी|

वह आज भी हमारे दिल मे पहला स्वतंत्रता कर्मी के रूप में जिन्दा हें| मंगल पांडे के याद मे कई नाट्य रूपान्तर और ड्रामा किया जाता है | उनके नाम में भारत सरकार ने डाक टिकेट भी जारी किया है जो की उनकी देश भक्ति के प्रति सम्मान है |

नाम मंगल पांडे
जन्म तिथि 19 जुलाई 1857
व्यापार ईस्ट इंडिया कंपनी में सेना
प्रसिद्द हुए क्यूंकि वह सच्चे देश भक्त थे
मृत्यु 8 अप्रैल 1857
ज़िंदा हें आज भी हमारे दिलों में

Conclusion: मंगल पांडे की जीवन कविता का सार

मंगल पांडे की ब्रिटिश क़ानून के खिलाफ आवाज़ उठाना और समग्र देश की भला के लिए डट के खड़े रहना उनको आज भी हमारे दिल में ज़िंदा रखा है| चलिए इस महान देश भक्त को अपने दिल से एक बार सुक्रियादा करें और जोर से “जय हिन्द” का नारा लगायें |

कैसे लगा आपको मंगल पांडे की जीवनी ? अगर आपके पास भी कोई जानकारी है मंगल पांडे की बायोग्राफी के बारे में तो हमे नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रुर लिख के बताएं| आप इस आर्टिकल से मंगल पांडे के ऊपर निबंध भी लिख सकते हें औ| नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में हमें ज़रुर लिख के बताएं की आपने मंगल पांडे की जीवनी से क्या सिखा है|

जय हिन्द...........  जय भारत!

 

1 thought on “मंगल पांडे की जीवनी (Mangal Pandey Life History/ biography Nibandh in Hindi)”

  1. सबसे पहले बलिया में 19 जुलाई, 1827 जन्मे भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पाण्डेय को नमन करता हूँ. जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज़ उठाई और स्वतंत्रता की पहली ज्वाला को जलाया .

    धन्यवाद hindi blogging tips आपका जो आपने इतना विस्तार से मंगल पाण्डेय जी के जीवन के बारे में लिखा और हम सब को अवगत कराया महान क्रांतिकारी मंगल पाण्डेय जी के इतिहास से .

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